पोर्टल पर लाखों का व्यय दर्ज, कई कार्यों का मूल्यांकन नहीं — 2025 के पुलिया-सीसी रोड भी सवालों के घेरे में, पुराने काम अब तक ‘चल रहे..
सिवनी/लखनादौन। ग्राम पंचायत बिछुआ लोंदा के विकास कार्यों का ऑनलाइन रिकॉर्ड पंचायत की निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। उपलब्ध पोर्टल आंकड़ों में पंचायत के 17 विकास कार्य दर्ज हैं। इनकी स्वीकृत राशियों को जोड़ने पर करीब 2.74 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान सामने आता है।
रिकॉर्ड की सबसे गंभीर बात यह है कि कई कार्यों में लाखों रुपए का व्यय दर्ज है, लेकिन मूल्यांकन राशि शून्य दिखाई दे रही है। यानी सरकारी रिकॉर्ड में पैसा खर्च होना दर्ज है, लेकिन उसी रिकॉर्ड में कार्य के मूल्यांकन की प्रविष्टि नहीं है। ऐसे में सवाल सीधा है—भुगतान किस आधार पर हुआ और काम का मूल्यांकन किस स्तर पर किया गया?
*2025 में करोड़ों के पुलिया-सीसी रोड, फिर मूल्यांकन शून्य क्यों?*
वर्ष 2024-25 और 2025 में स्वीकृत ST सघन बस्ती विकास योजना के अंतर्गत बिछुआ लोंदा पंचायत क्षेत्र में कई बड़े निर्माण कार्य दर्ज हैं। इनमें देवाघाट नाला पुलिया, टपरिया टोला पहुंच मार्ग, बिछुआ से सीयाराम गौंड के घर तक पहुंच मार्ग, मेन रोड से टपरिया टोला मार्ग, मोहगांव खुर्द से लौदा रोड सहित विभिन्न पुलिया निर्माण शामिल हैं।
इसी अवधि में मोहगांव खुर्द से रामकुमार के घर की ओर, मेन रोड से टपरिया टोला, प्राथमिक शाला क्षेत्र, शांतिधाम मार्ग तथा मोहगांव खुर्द मड़िया से गेदालाल के घर की ओर सीसी सड़क के कार्य भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
कई कार्यों की स्वीकृत राशि करीब 25 लाख रुपए के आसपास है। रिकॉर्ड में कई जगह 24.96 लाख से 24.99 लाख रुपए तक का व्यय दर्ज दिखाई देता है। इसके बावजूद मूल्यांकन कॉलम में शून्य दर्ज होना व्यवस्था पर सीधा सवाल है।
*खर्च लगभग पूरा, मूल्यांकन फिर भी शून्य*
सरकारी निर्माण कार्य में स्वीकृति, तकनीकी प्रक्रिया, माप, मूल्यांकन और भुगतान की अपनी निर्धारित प्रक्रिया होती है। ऐसे में पोर्टल पर यदि कार्य पर लाखों रुपए खर्च दर्ज हैं और मूल्यांकन राशि 0 दिखाई देती है, तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि—
*क्या कार्य का भौतिक सत्यापन हुआ?*
क्या माप पुस्तिका में कार्य की मात्रा दर्ज है?
क्या तकनीकी अधिकारी ने मौके पर माप लेकर मूल्यांकन किया?
मूल्यांकन के बिना भुगतान किस आधार पर दर्ज हुआ?
इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।
*2018 का काम भी ‘चल रहा’, रिकॉर्ड पर सवाल*
बिछुआ लोंदा पंचायत के रिकॉर्ड में केवल नए निर्माण ही सवाल नहीं खड़े करते। वर्ष 2018-19 का व्यक्तिगत शौचालय निर्माण कार्य भी रिकॉर्ड में चल रहे स्थिति में दिखाई देता है। इसकी स्वीकृत राशि 9.84 लाख रुपए तथा दर्ज व्यय 5.14 लाख रुपए है।
इसी वर्ष तिरगड्डा से हनुमान मंदिर तक सीसी रोड के लिए 2.82 लाख रुपए स्वीकृत और 2.79 लाख रुपए व्यय दर्ज है।
वर्ष 2023-24 में मुख्य मार्ग से उजियार के मकान एवं हनुमान मंदिर से अनिल के मकान की ओर सीसी रोड के लिए 3.01 लाख रुपए की स्वीकृति तथा करीब 2.588 लाख रुपए का व्यय दर्ज है।
सवाल यह है कि पुराने कार्य यदि पूर्ण हो चुके हैं तो पोर्टल पर उनकी स्थिति अद्यतन क्यों नहीं है? और यदि वास्तव में कार्य अधूरे हैं तो इतने समय में उनकी भौतिक प्रगति क्या है?
*फाइलों से निकलकर मौके तक पहुंचे जांच अधिकारी*
अब जिम्मेदार अधिकारियों के सामने सवालों की लंबी सूची है।
17 कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की पूरी फाइल कहां है?
प्रत्येक कार्य की एमबी किस अधिकारी ने दर्ज की?
मूल्यांकन किसने किया और कब किया?
भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट कहां है?
पूर्णता प्रमाण-पत्र किन कार्यों को जारी किए गए?
बिल-वाउचर और भुगतान किस आधार पर स्वीकृत हुए?
2025 के पुलिया और सीसी रोड आज मौके पर किस स्थिति में हैं?
2018 के कार्य अब तक पोर्टल पर ‘चल रहे’ क्यों हैं?
स्वीकृत राशि और वास्तविक व्यय का कार्यवार मिलान कहां है?
इन सवालों का जवाब केवल कार्यालयी फाइल से नहीं, बल्कि मौके पर जाकर कार्य की वास्तविक स्थिति और एमबी-भुगतान रिकॉर्ड का मिलान करने से सामने आएगा।
पोर्टल का रिकॉर्ड अंतिम निष्कर्ष नहीं, लेकिन जांच का मजबूत आधार जरूर
उपलब्ध ऑनलाइन रिकॉर्ड अपने आप में किसी वित्तीय अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं है। लेकिन लाखों रुपए का व्यय दर्ज होना, मूल्यांकन राशि शून्य दिखाई देना और वर्षों पुराने कार्यों का अब तक ‘चल रहे’ स्थिति में दर्ज रहना निश्चित रूप से रिकॉर्ड के सत्यापन की जरूरत पैदा करता है।
मामले में जनपद पंचायत लखनादौन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित तकनीकी अधिकारियों को बिछुआ लोंदा पंचायत के प्रत्येक बड़े निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण, एमबी परीक्षण, भुगतान रिकॉर्ड का मिलान और कार्य की भौतिक प्रगति का सत्यापन कराना चाहिए।
यदि दस्तावेज और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित कर शासन के नियमानुसार जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा।
अब सवाल फाइल का नहीं, मौके का है—2.74 करोड़ के कामों में कितना काम जमीन पर है और कितना सिर्फ रिकॉर्ड में?यह संस्करण आरोप को तथ्य के रूप में स्थापित किए बिना रिकॉर्ड, राशि, मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन पर सीधा दबाव बनाता है।