कहीं स्वीकृति से ज्यादा खर्च, कहीं मूल्यांकन शून्य, कहीं वर्षों पुराने कामों का व्यय शून्य — अब कागजी खानापूर्ति नहीं, हर कार्य का मौके पर हिसाब चाहिए
सिवनी/लखनादौन। जनपद पंचायत लखनादौन अंतर्गत ग्राम पंचायत करनपुर के विकास कार्यों से संबंधित सरकारी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध डेटा में वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक के निर्माण कार्य दर्ज हैं। अनेक कार्यों में राशि खर्च दिखाई गई है, लेकिन उसी रिकॉर्ड में “मूल्यांकन राशि: 0” यानी कार्य का मूल्यांकन दर्ज नहीं किया गया है। मामला केवल ऑनलाइन प्रविष्टि का नहीं है। सवाल यह है कि जब सरकारी राशि खर्च दर्ज हो गई तो कार्य का तकनीकी मूल्यांकन कहां है? निर्माण की मात्रा, गुणवत्ता और वास्तविक उपयोगिता किस आधार पर प्रमाणित की गई? यदि मूल्यांकन अभी तक दर्ज नहीं हुआ है तो भुगतान और कार्य की प्रगति का सत्यापन किस दस्तावेज के आधार पर हुआ?
₹50 हजार की स्वीकृति, खर्च ₹51,500
सबसे स्पष्ट सवाल वर्क आईडी 101294951 पर है। करनपुर के शांतिधाम में अतिरिक्त कार्य के लिए ₹50,000 की प्रशासनिक स्वीकृति दर्ज है, जबकि पोर्टल पर ₹51,500 व्यय दर्ज है। अर्थात रिकॉर्ड के अनुसार स्वीकृत राशि से ₹1,500 अधिक व्यय दर्ज है। पोर्टल स्वयं इस प्रविष्टि पर स्वीकृत राशि से अधिक व्यय होने की टिप्पणी प्रदर्शित करता है। साथ ही मूल्यांकन राशि ₹0 दर्ज है। अब सीधा सवाल है—स्वीकृति से अधिक राशि किस सक्षम स्वीकृति के आधार पर खर्च हुई? यदि अतिरिक्त व्यय की अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी किसकी है और अतिरिक्त राशि की वसूली क्यों न की जाए?
दूसरे रंगमंच में भी स्वीकृति से ज्यादा व्यय
वर्क आईडी 100769603 में रंगमंच निर्माण के लिए ₹1,50,000 की स्वीकृति है, जबकि पोर्टल पर ₹1,50,200 व्यय दर्ज है। यहां भी ₹200 अधिक व्यय दर्ज है और मूल्यांकन राशि शून्य दिखाई गई है। राशि छोटी या बड़ी होने का सवाल नहीं है। सरकारी कार्य में स्वीकृत राशि और वास्तविक व्यय का हिसाब नियमसम्मत होना चाहिए। अतिरिक्त भुगतान या अतिरिक्त व्यय है तो उसका वैधानिक आधार रिकॉर्ड में स्पष्ट होना चाहिए।
₹24.90 लाख की पुलिया, व्यय ₹12.44 लाख — मूल्यांकन फिर शून्य
वर्क आईडी 101377814 के तहत करनपुर से मेखदोन मार्ग पर पुलिया निर्माण के लिए ₹24.90 लाख की स्वीकृति दर्ज है। पोर्टल पर अब तक ₹12,44,976 व्यय दर्ज है।
कार्य की स्थिति चल रहे है और मूल्यांकन राशि ₹0 दर्ज है
इतनी बड़ी राशि के कार्य में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि मौके पर अब तक कितना निर्माण हुआ, कितनी मात्रा में सामग्री लगी, कितनी राशि का भुगतान हुआ और तकनीकी अधिकारी द्वारा कितना कार्य प्रमाणित किया गया।
2019 के सीसी रोड—व्यय शून्य, मूल्यांकन भी शून्य
वर्ष 2019-20 के 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत कई सीसी सड़क निर्माण कार्य दर्ज हैं।
वर्क आईडी 100729876 — स्वीकृति ₹2,55,680, व्यय ₹0, मूल्यांकन ₹0।
वर्क आईडी 100729879 — स्वीकृति ₹1,96,500, व्यय ₹0, मूल्यांकन ₹0।
वर्क आईडी 100729887 — स्वीकृति ₹1,76,800 दर्ज।
इन कार्यों की स्थिति सीसी जारी दिखाई जा रही है
वर्षों पुराने कार्यों के मामले में प्रशासन को मौके पर जाकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्य वास्तव में हुआ या नहीं, कितना हुआ, किस गुणवत्ता का हुआ और वर्तमान स्थिति क्या है। केवल पोर्टल पर स्थिति दर्ज कर देने से सरकारी निर्माण की वास्तविकता प्रमाणित नहीं हो जाती।
₹2 लाख का किचन शेड भी जांच के घेरे में
वर्क आईडी 100712967 में वर्ष 2019-20 में किचन शेड निर्माण के लिए ₹2 लाख की स्वीकृति दर्ज है। पोर्टल पर ₹1,49,600 व्यय दर्ज है।
लेकिन मूल्यांकन राशि ₹0 है और स्थिति चल रहे दिखाई गई है
छह-सात वर्ष पुराने कार्य के लिए चल रहे स्थिति अपने आप में प्रशासनिक सत्यापन का विषय है। यहां भी स्वीकृति से लेकर भुगतान और वर्तमान भौतिक स्थिति तक पूरा रिकॉर्ड मिलाया जाना चाहिए।
कूप मरम्मत के दोनों कार्यों में भी मूल्यांकन शून्य
वर्ष 2024-25 में करनपुर पंचायत के अंतर्गत दो सार्वजनिक कूप सफाई एवं मरम्मत कार्य दर्ज हैं—
– मेखदोन माल — स्वीकृति ₹49,000, व्यय ₹37,870।
– ग्राम करनपुर — स्वीकृति ₹49,000, व्यय ₹37,070 दोनों में पोर्टल पर मूल्यांकन राशि ₹0 दर्ज है और स्थिति चल रहे है।
प्रश्न यह है कि मरम्मत कार्य की वास्तविक मात्रा और गुणवत्ता का तकनीकी मूल्यांकन किस स्तर पर किया गया?
नाडेप और लीकेज पिट में भुगतान, मूल्यांकन शून्य..
वर्ष 2022-23 के ठोस और तरल कचरा प्रबंधन अंतर्गत कई लीकेज पिट और नाडेप टैंक निर्माण दर्ज हैं।
कई कार्यों में ₹15,997 से ₹18,990 तक व्यय दर्ज है, लेकिन संबंधित प्रविष्टियों में मूल्यांकन राशि ₹0 दिखाई गई है।
जब छोटे-छोटे निर्माण कार्यों में भी राशि का भुगतान दर्ज हो चुका है, तब मूल्यांकन अभिलेखों का अभाव प्रशासनिक जांच का सीधा विषय होना चाहिए।
अब केवल फाइल नहीं खुलेगी, जमीन पर जांच होगी..
करनपुर पंचायत के इन कार्यों की जांच में केवल पंचायत कार्यालय की फाइलों को देखकर खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन को प्रत्येक चिन्हित कार्य के लिए—
तकनीकी स्वीकृति → प्रशासकीय स्वीकृति → कार्यादेश → माप पुस्तिका (एमबी) → सामग्री विवरण → बिल-वाउचर → भुगतान विवरण → मूल्यांकन → पूर्णता प्रमाण-पत्र → स्थल की वर्तमान स्थिति का मिलान कराना चाहिए। इसके बाद मौके का पंचनामा और तकनीकी माप कराया जाना चाहिए।
दोषपूर्ण निर्माण मिला तो केवल कागज नहीं, निर्माण भी कार्रवाई के दायरे में आए..
यदि जांच में किसी कार्य का निर्माण स्वीकृत डिजाइन, तकनीकी मापदंड, निर्धारित गुणवत्ता या स्वीकृत कार्य से भिन्न पाया जाता है तो संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लागू पंचायत, वित्तीय एवं तकनीकी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। जहां निर्माण दोषपूर्ण, मानकविहीन अथवा नियमविरुद्ध प्रमाणित हो, वहां केवल संबंधित कर्मचारी या एजेंसी पर कार्रवाई तक मामला सीमित न रहे। दोषपूर्ण निर्माण को नियमानुसार हटाने/तोड़ने, सुधार कराने या पुनर्निर्माण कराने तथा सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई भी की जाए। जहां बिना वैध स्वीकृति के अतिरिक्त व्यय प्रमाणित हो, वहां जिम्मेदारी तय कर अतिरिक्त राशि की वसूली की जाए।
प्रशासन के सामने सीधे सवाल..
1. करनपुर पंचायत के कितने कार्यों का मूल्यांकन आज तक दर्ज नहीं हुआ?
2. जिन कार्यों में मूल्यांकन राशि ₹0 है, उनका तकनीकी मूल्यांकन कब हुआ?
3. स्वीकृत राशि से अधिक व्यय दर्ज होने पर जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
4. वर्ष 2019-20 के जिन कार्यों में व्यय ₹0 है, उनकी वर्तमान भौतिक स्थिति क्या है?
5. कितने कार्य वास्तव में पूर्ण हैं और कितने रिकॉर्ड में अभी भी चल रहे हैं?
6. क्या सभी भुगतान से पहले एमबी में माप दर्ज किया गया?
7. क्या सभी कार्यों के पूर्णता प्रमाण-पत्र उपलब्ध हैं?
8. क्या किसी तकनीकी अधिकारी ने स्थल निरीक्षण कर गुणवत्ता प्रमाणित की?
9. यदि किसी कार्य में तकनीकी कमी मिलती है तो जिम्मेदारों से राशि की वसूली कब होगी?
10. क्या पुराने और संदिग्ध प्रविष्टियों वाले सभी कार्यों का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाएगा?
अब जिम्मेदारी तय होनी चाहिए..
करनपुर पंचायत के पोर्टल रिकॉर्ड को देखकर तत्काल किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज विरोधाभासों को नजरअंदाज करना भी प्रशासनिक रूप से उचित नहीं है। अब आवश्यकता है स्वतंत्र तकनीकी जांच और स्थल सत्यापन की। यदि जांच में रिकॉर्ड और जमीन के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी, पंचायत पदाधिकारी अथवा संबंधित निर्माण एजेंसी की भूमिका नियमों के अनुसार तय की जाए। सरकारी धन जनता का धन है। पोर्टल पर खर्च लिख देना पर्याप्त नहीं—हर रुपये के बदले जमीन पर काम दिखना चाहिए। जहां काम गलत है, वहां नियमानुसार निर्माण हटे; जहां गुणवत्ता खराब है, वहां सुधार या पुनर्निर्माण हो; जहां अतिरिक्त या अनधिकृत भुगतान प्रमाणित हो, वहां राशि की वसूली हो और जिम्मेदारी तय हो।