बिजना पंचायत के विकास कार्यों पर सरकारी पोर्टल ने खड़े किए गंभीर सवाल..

₹1.25 करोड़ के 36 कार्य दर्ज, करीब ₹86.68 लाख व्यय ...

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₹1.25 करोड़ के 36 कार्य दर्ज, करीब ₹86.68 लाख व्यय दर्शाया गया; 36 में से हर कार्य का मूल्यांकन राशि ₹0, पुराने काम आज भी “चल रहे”

सिवनी/लखनादौन। जनपद पंचायत लखनादौन अंतर्गत ग्राम पंचायत बिजना के विकास कार्यों का उपलब्ध सरकारी पोर्टल डेटा पंचायत स्तर पर निगरानी, भौतिक सत्यापन और कार्य पूर्णता प्रमाणन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। वर्ष 2015-16 से 2026-27 तक दर्ज 36 कार्यों की स्वीकृत राशि करीब ₹1.254 करोड़ है, जबकि पोर्टल पर ₹86.68 लाख से अधिक का व्यय दर्ज दिखाई देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध रिकॉर्ड में सभी 36 कार्यों के सामने मूल्यांकन राशि ₹0 दर्ज है और पोर्टल स्पष्ट रूप से लिख रहा है—“कार्य का मूल्यांकन दर्ज नहीं किया गया है।”

*पुराने काम भी रिकॉर्ड में “चल रहे”*

रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2017-18 में ₹10 लाख की लागत से अमानटोला पुलिया सह रपटा निर्माण स्वीकृत हुआ। इसमें ₹9,99,408 व्यय दर्ज है, लेकिन मूल्यांकन राशि शून्य है और स्थिति चल रहे दर्शाई गई है। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में ₹9.82 लाख के पुलिया निर्माण पर ₹9,81,994 व्यय दर्ज है, लेकिन मूल्यांकन ₹0 और स्थिति फिर चल रहे है।

वर्ष 2018-19 के ही ₹8.27 लाख के सीसी सड़क-सह-नाली कार्य में ₹5.66 लाख व्यय दर्ज है। इसके सामने भी मूल्यांकन ₹0 है।

*₹6.20 लाख और ₹2.50 लाख के सड़क कार्य में व्यय शून्य*

पोर्टल पर वर्ष 2018-19 के दो सीसी सड़क कार्य क्रमशः ₹6.20 लाख और ₹2.50 लाख की स्वीकृति के साथ दर्ज हैं। दोनों में व्यय ₹0 तथा मूल्यांकन ₹0 दर्ज है, फिर भी वर्तमान स्थिति चल रहे बताई गई है।

वर्ष 2019-20 का ₹6.20 लाख का सीसी सड़क कार्य, वर्ष 2020-21 की पंचायत भवन बाउंड्रीवॉल का ₹3.30 लाख का कार्य तथा वर्ष 2016-17/2017-18 से संबंधित कई पुराने कार्य भी रिकॉर्ड में सवाल खड़े कर रहे हैं।

*सबसे बड़ा सवाल—व्यय हुआ तो मूल्यांकन कहां है?*

बिजना पंचायत के उपलब्ध 36 कार्यों में पोर्टल पर लगभग ₹86.68 लाख का व्यय दर्ज है। इसके बावजूद किसी भी कार्य के सामने मूल्यांकन राशि दर्ज नहीं है। रिकॉर्ड में ₹0 मूल्यांकन राशि लगातार दिखाई दे रहा है।

यह स्थिति सीधे तौर पर यह प्रश्न खड़ा करती है कि जिन कार्यों पर राशि खर्च दिखाई गई है, उनका तकनीकी/भौतिक मूल्यांकन किस स्तर पर किया गया, किस अधिकारी ने किया, कब किया और उसका अभिलेख कहां है?

*2024-25 और 2025-26 के काम भी सवालों से बाहर नहीं*

वर्ष 2024-25 में सार्वजनिक कूप जीर्णोद्धार, स्टॉपडेम जीर्णोद्धार और रिचार्ज पिट जैसे कार्य दर्ज हैं। इनमें अधिकांश में स्वीकृति के लगभग बराबर व्यय दिखाई देता है, लेकिन मूल्यांकन फिर भी ₹0 है।

वर्ष 2025-26 में ₹3 लाख की पक्की नाली, ₹4.24 लाख के शांति धाम सौंदर्यीकरण तथा ₹3 लाख के शांति धाम निर्माण सहित कार्य दर्ज हैं। इन पर भी व्यय दर्ज है, लेकिन पोर्टल मूल्यांकन राशि शून्य बता रहा है।

वर्ष 2026-27 के रिकॉर्ड में ₹1.71 लाख के पंचायत भवन शौचालय निर्माण पर ₹1.08 लाख व्यय दर्ज है, जबकि ₹45 हजार के पशु हौदी निर्माण में व्यय ₹0 दिख रहा है। दोनों कार्यों की स्थिति चल रहे है।

एक रिकॉर्ड में नाम कुछ, कार्य विवरण कुछ और कार्य क्रमांक 101330192 में योजना के अंतर्गत “सामुदायिक वाचनालय भवन” कार्य प्रकार दर्ज है, जबकि काम का विवरण में “ग्राम कुहिया में सीसी रोड निर्माण कार्य” लिखा हुआ है। यह रिकॉर्ड प्रविष्टि भी विभागीय स्तर पर जांच का विषय बनती है कि स्वीकृत कार्य वास्तव में क्या था और पोर्टल पर कार्य विवरण किस आधार पर दर्ज किया गया।

*2015 से दर्ज कार्यों की भी जांच जरूरी*

वर्ष 2015-16 के सीसी सड़क कार्यों में ₹4.98 लाख और ₹2.64 लाख की स्वीकृतियां दर्ज हैं, लेकिन दोनों में व्यय ₹0 है। इसके बावजूद उनकी स्थिति पुरा होना दर्शाई गई है।

₹1.38 लाख का वर्ष 2015-16 का सीसी सड़क कार्य भी पुरा होना दर्ज है, लेकिन व्यय ₹0 तथा मूल्यांकन ₹0 है।

यहां मूल प्रश्न केवल भुगतान का नहीं, बल्कि कार्य की वास्तविक स्थिति, माप पुस्तिका, मूल्यांकन, पूर्णता प्रमाणपत्र और पोर्टल प्रविष्टि की विश्वसनीयता का है।

*अधिकारियों के सामने सीधे सवाल*

अब जनपद पंचायत और संबंधित तकनीकी अमले को स्पष्ट करना चाहिए—

36 कार्यों का मूल्यांकन ₹0 क्यों दर्ज है?

जिन कार्यों में लाखों रुपये का व्यय दर्ज है, उनकी माप-जोख पुस्तिका (एमबी) में क्या स्थिति है?

किस अधिकारी/तकनीकी कर्मचारी ने इन कार्यों का भौतिक सत्यापन किया?

पुराने कार्य वर्षों बाद भी चल रहे क्यों दिखाई दे रहे हैं?

जिन कार्यों को पूरा होना बताया गया है, उनका पूर्णता प्रमाणपत्र कहां है?

₹0 व्यय वाले कार्य पूरा होना कैसे हुए?

कार्य क्रमांक 101330192 में वाचनालय और सीसी सड़क का विवरण अलग-अलग क्यों है?

क्या पंचायत के सभी 36 कार्यों का स्थल निरीक्षण कराकर पोर्टल रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा?

यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

*प्रशासन के लिए अब कागजी जवाब नहीं, स्थल सत्यापन जरूरी*

उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड स्वयं मूल्यांकन दर्ज न होने की बात बता रहा है। इसलिए मामले में केवल पंचायत से जवाब मांगना पर्याप्त नहीं होगा। जनपद पंचायत के तकनीकी अमले द्वारा सभी 36 कार्यों का स्थल निरीक्षण, एमबी रिकॉर्ड, भुगतान अभिलेख, पूर्णता प्रमाणपत्र और पोर्टल प्रविष्टियों का मिलान कराया जाना चाहिए। ₹1.25 करोड़ के स्वीकृत कार्यों में ₹86.68 लाख से अधिक व्यय दर्ज होने और फिर भी 36 में 36 कार्यों का मूल्यांकन ₹0 रहने की स्थिति प्रशासनिक निगरानी पर सीधा प्रश्न है। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस रिकॉर्ड का मौके पर सत्यापन कराते हैं या मामला केवल फाइलों और जवाबों तक सीमित रहता है।

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