सहजपुरी पंचायत के 57 कार्य, रिकॉर्ड में उठे गंभीर सवाल

कहीं स्वीकृति से अधिक व्यय की पोर्टल आपत्ति, कहीं मूल्यांकन ...

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कहीं स्वीकृति से अधिक व्यय की पोर्टल आपत्ति, कहीं मूल्यांकन शून्य… वर्षों पुराने काम आज भी रिकॉर्ड में चल रहे और सीसी जारी

लखनादौन। ग्राम पंचायत सहजपुरी के विकास कार्यों का सरकारी डेटा ही पंचायत व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है। उपलब्ध पोर्टल रिकॉर्ड में वर्ष 2011-12 से 2025-26 तक के 57 कार्य दर्ज हैं। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में कार्यों के सामने “मूल्यांकन राशि : 0” यानी मूल्यांकन राशि दर्ज नहीं है। कई पुराने कार्य आज भी चल रहे अथवा सीसी जारी स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।

रिकॉर्ड में कुछ कार्यों पर पोर्टल स्वयं यह आपत्ति दर्ज कर रहा है कि स्वीकृत राशि से अधिक व्यय किया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित अभिलेख, माप पुस्तिका, तकनीकी मूल्यांकन, भुगतान व पूर्णता प्रमाण-पत्र की जांच जरूरी हो जाती है।

*स्वीकृति और व्यय का रिकॉर्ड भी सवालों में*

वर्क आईडी 100221959 में ग्रामीण नलजल योजना विस्तार, बालाभवानी चौकी के लिए प्रशासनिक स्वीकृति 8.57 लाख दर्ज है, जबकि व्यय 61,734 रुपये और मूल्यांकन शून्य है। पोर्टल पर स्वीकृति से अधिक व्यय की आपत्ति भी दिखाई गई है।

वर्क आईडी 100481891 में धोरिया रोड स्थित कुआं गहरीकरण के लिए 30 हजार रुपये की स्वीकृति के मुकाबले 68,068 रुपये व्यय दर्ज है। यहां भी मूल्यांकन शून्य है और पोर्टल ने स्वीकृति से अधिक व्यय की आपत्ति दर्ज की है।

वर्क आईडी 100197926 में टिंगीटोला हैंडपंप खनन के लिए 1.14 लाख की स्वीकृति दर्ज है, जबकि व्यय 35,626 रुपये दर्ज है। पोर्टल ने यहां भी स्वीकृत राशि से अधिक व्यय की आपत्ति प्रदर्शित की है।

वर्क आईडी 100390404 में वर्ष 2011-12 के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 5 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति और 1,24,700.24 रुपये व्यय दर्ज है, फिर भी पोर्टल पर स्वीकृति से अधिक व्यय की आपत्ति तथा मूल्यांकन शून्य दिखाई दे रहा है। इन प्रविष्टियों में राशि की इकाई/डेटा प्रविष्टि की भी जांच आवश्यक है।

*एक ही नाली का काम, दो अलग रिकॉर्ड*

सबसे महत्वपूर्ण जांच का विषय गंगा के घर से शासकीय कूप तक नाली के ऊपर कवर का कार्य है।

वर्क आईडी 101141721 में वर्ष 2023-24 की 2.31 लाख की स्वीकृति और 74,226 रुपये व्यय दर्ज है।
इसके बाद वर्क आईडी 101230752 में वर्ष 2025-26 में इसी नाम और इसी स्थान का कार्य फिर से दर्ज है, जिसकी स्वीकृति 2.31 लाख और व्यय 36,000 रुपये दर्ज है।

सवाल सीधा है—एक ही कार्य दो अलग-अलग वर्षों में दो वर्क आईडी के साथ क्यों दर्ज हुआ? क्या पहला काम अधूरा था? क्या दूसरे चरण के लिए नई स्वीकृति थी? या पुराने कार्य का ही पुनः रिकॉर्ड बनाया गया? इसका जवाब फाइल, माप पुस्तिका और स्थल निरीक्षण से ही साफ होगा।

*लाखों के काम, मूल्यांकन फिर भी शून्य*

रिकॉर्ड में कई ऐसे कार्य हैं जिनमें बड़ी राशि खर्च दर्ज है, लेकिन मूल्यांकन राशि शून्य है।

– वर्क आईडी 100432657 — सीसी रोड, व्यय ₹3,58,796, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100464911 — बिजना नदी स्नान घाट, व्यय ₹4,94,271.40, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100870582 — टिंगीटोला रंगमंच, व्यय ₹1,38,600, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 101183177 — पंचायत भवन परिसर बाउंड्रीवॉल, व्यय ₹7,96,656, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 101199740 — टिंगीटोला सामुदायिक भवन, व्यय ₹6,59,540, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100588472 — बिजना नदी स्नान घाट, व्यय ₹4,99,976.60, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100588495 — स्टॉप डेम, व्यय ₹3,95,480, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100912859 — सामुदायिक शौचालय, व्यय ₹2,10,000, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100828652 — सामुदायिक शौचालय, व्यय ₹2,08,791.05, मूल्यांकन 0।

– वर्क आईडी 100331202 — टिंगीटोला स्नान घाट, व्यय ₹2,90,600, मूल्यांकन 0।

यह केवल कागजी आंकड़ा नहीं है। यदि कार्यों का मूल्यांकन पोर्टल पर दर्ज नहीं है तो माप पुस्तिका, तकनीकी मूल्यांकन और पूर्णता की वास्तविक स्थिति सामने लाना विभाग की जिम्मेदारी है।

*2014 के काम भी रिकॉर्ड में बंद, लेकिन हिसाब अधूरा?*

वर्ष 2014-15 के तीन जनभागीदारी कार्यों में बालाभवानी मंदिर के पास घाट कटिंग के लिए क्रमशः 5-5 लाख रुपये की स्वीकृति दर्ज है।

वर्क आईडी 100273254, 100283413 और 100283420 — तीनों में व्यय शून्य और मूल्यांकन भी शून्य है, जबकि वर्तमान स्थिति सीसी जारी दर्ज है।

वहीं वर्क आईडी 100289458 में स्नान घाट निर्माण के लिए 5 लाख की स्वीकृति और व्यय शून्य दर्ज है।
वर्क आईडी 100257819 में 3 लाख की स्वीकृति और व्यय शून्य है।

सवाल यह नहीं कि रिकॉर्ड में “सीसी जारी” क्यों लिखा है। सवाल यह है कि यदि भुगतान/व्यय शून्य है तो कार्य की वर्तमान भौतिक स्थिति क्या है और सीसी किस आधार पर जारी हुआ?

*नलजल से लेकर शौचालय तक रिकॉर्ड की लंबी सूची*

सहजपुरी में दर्ज अन्य प्रमुख कार्यों में विजय के मकान से कंचन यादव के मकान तक सीसी रोड, रवि के मकान से बदनौर की ओर सीसी रोड, पंचायत भवन मरम्मत, विभिन्न कुओं का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, रिचार्ज पिट, पुलिया, नाडेप टैंक, सामुदायिक सोखता गड्ढे, आंगनवाड़ी बाउंड्रीवॉल, फॉसन वाटिका, वर्षाजल संचयन, पंचायत भवन बाउंड्रीवॉल और सामुदायिक भवन शामिल हैं।

विशेष रूप से वर्ष 2022-23 और 2023-24 के Solid and Liquid Waste Management के कई कार्यों में लगभग 19 हजार रुपये की स्वीकृति के विरुद्ध लगभग पूरी राशि खर्च दर्ज है, लेकिन मूल्यांकन राशि फिर भी 0 दिखाई देती है।

*अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल*

इन कार्यों में तकनीकी स्वीकृति कभी एसडीओ, एई या ईई, जबकि प्रशासनिक स्वीकृति कभी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत सीईओ, जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर स्तर से दर्ज है। ऐसे में जांच केवल पंचायत तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा।

जनपद पंचायत लखनादौन के संबंधित तकनीकी अमले से लेकर सीईओ, जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों और जिला स्तर के सक्षम अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि—

1. जिन कार्यों का मूल्यांकन शून्य है, उनका तकनीकी मूल्यांकन क्यों दर्ज नहीं हुआ?

2. चल रहे कार्य वर्षों बाद भी लंबित क्यों हैं?

3. सीसी जारी कार्यों में भुगतान, माप पुस्तिका और पूर्णता प्रमाण-पत्र की स्थिति क्या है?

4. स्वीकृति से अधिक व्यय वाली प्रविष्टियों में राशि की इकाई और भुगतान रिकॉर्ड क्या कहता है?

5. एक ही नाली कार्य दो अलग वर्क आईडी में क्यों दर्ज हुआ?

6. 2014 से दर्ज ऐसे कार्य जिनमें व्यय शून्य है, उनकी मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है?

7. घाट, स्टॉप डेम, सड़क, कुआं, शौचालय और भवन कार्यों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट कहां है?

*कलेक्टर लें संज्ञान, सिर्फ कागजी जांच नहीं*

सरकारी पोर्टल पर दर्ज ये आंकड़े अपने आप में किसी व्यक्ति के विरुद्ध अनियमितता सिद्ध नहीं करते, लेकिन जांच योग्य विसंगतियां अवश्य सामने रखते हैं। इसलिए जिला प्रशासन को चाहिए कि सहजपुरी पंचायत के इन 57 कार्यों की चयनित नहीं बल्कि अभिलेखवार और स्थलवार जांच कराई जाए।

माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति, बिल-वाउचर, भुगतान विवरण, जियो-टैग/फोटो, मूल्यांकन, पूर्णता प्रमाण-पत्र और मौके की वर्तमान स्थिति को आमने-सामने रखकर जांच हो।

कागज में काम पूरा और जमीन पर अधूरा—या पोर्टल में मूल्यांकन शून्य और भुगतान जारी—यदि कहीं ऐसा है तो जिम्मेदारी तय होना चाहिए। पंचायत के रिकॉर्ड पर सवाल हैं तो जवाब भी रिकॉर्ड से ही देना होगा।

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