जनस्वास्थ्य के नाम पर खुला अपराध
सिवनी- ग्राम कोडरा में शासन द्वारा स्वीकृत उप-स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण अब विकास कार्य नहीं रहा, बल्कि यह संगठित लूट, प्रशासनिक संरक्षण और ठेकेदार-तंत्र की बेशर्मी का जीवंत उदाहरण बन चुका है। जिस इमारत का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा देना था, वही आज घटिया निर्माण, नियमों की हत्या और जवाबदेही की कब्र बनती जा रही है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि यह निर्माण कार्य शासन की योजना नहीं, ठेकेदार की तानाशाही से चल रहा है, जहाँ न कानून का डर है, न निरीक्षण की बाध्यता, न ही जनता की परवाह, यह निर्माण नहीं, एक सोची-समझी साज़िश है अगर यह केवल लापरवाही होती, तो बात अलग थी, लेकिन यहाँ जो दिख रहा है, वह सुनियोजित भ्रष्टाचार है, बिना गुणवत्ता जांच के सामग्री का उपयोग मानक से कम सरिया, घटिया सीमेंट बिना लेवलिंग, बिना क्योरिंग, बिना परीक्षण इंजीनियर का नाम केवल फाइलों में, ज़मीन पर नहीं यह सब संकेत करता है कि यह इमारत टिकाऊ नहीं, बल्कि चलाऊ बनाई जा रही है, ताकि बिल पास हो जाए, भुगतान निकल जाए और बाद में जो होगा, वह भगवान भरोसे, ठेकेदार नहीं, ठेकेदारशाही यहाँ ठेकेदार एक संविदाकार नहीं, बल्कि सत्ता का समानांतर केंद्र बन बैठा है, उसकी मर्जी ही नियम है, उसकी सुविधा ही समय-सारिणी है। ग्रामीण बताते हैं कि काम कब होगा, कैसे होगा, कौन बोलेगा, सब ठेकेदार तय करता है। जो सवाल करेगा, उसे काम रुकने की धमकी दी जाती है, क्या यह लोकतंत्र है? या फिर ग्राम कोडरा को ठेकेदार गणराज्य घोषित कर दिया गया है? छोटे भैया नेता जनता के नहीं, ठेकेदार के एजेंट इस पूरे खेल में सबसे घिनौनी भूमिका निभा रहे हैं वे स्थानीय चाटुकार नेता, जो खुद को जनता का सेवक बताते हैं, लेकिन असल में ठेकेदार के दलाल बन चुके हैं, ये वही चेहरे हैं जो मंच पर विकास का भाषण देते हैं, कैमरे के सामने ईमानदारी का चोला ओढ़ते हैं, और पीछे से घटिया निर्माण पर पर्दा डालते हैं, जब ग्रामीण सवाल उठाते हैं, तो यही लोग आगे आकर डराने, दबाने और भ्रम फैलाने का काम करते हैं, इनसे पूछा जाना चाहिए क्या इन्हें जनता ने प्रतिनिधि चुना था या ठेकेदार का प्रवक्ता? प्रशासन की चुप्पी अपराध में सहभागिता सबसे बड़ा और सबसे गंभीर प्रश्न लखनादौन प्रशासन पर है, क्या प्रशासन अंधा है? क्या उसे यह घटिया निर्माण दिखाई नहीं देता? या फिर सब कुछ देखकर भी वह मौन है? क्योंकि कानून साफ कहता है, जहाँ अधिकारी जानकर भी कार्रवाई न करे, वहाँ वह अपराध में सहभागी माना जाता है, यदि समय रहते निरीक्षण नहीं हुआ, यदि गुणवत्ता जांच नहीं कराई गई, यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चुप्पी सीधी मिलीभगत मानी जाएगी, स्वास्थ्य केंद्र या भविष्य का हादसा? यह कोई पंचायत भवन या गोदाम नहीं, यह स्वास्थ्य केंद्र है, यहाँ गर्भवती महिलाएँ आएँगी, बच्चे टीकाकरण के लिए लाए जाएँगे, बीमार लोग आख़िरी उम्मीद लेकर पहुँचेंगे, अगर यही भवन कमजोर हुआ, अगर यही दीवारें जर्जर हुईं, तो कल को कोई हादसा हुआ तो खून किसके हाथ लगेगा? शासन के पैसे की खुली लूट यह मामला केवल निर्माण गुणवत्ता का नहीं, यह आर्थिक अपराध का है, करोड़ों नहीं, तो लाखों रुपये जनता के टैक्स का पैसा घटिया ईंट, मिलावटी सीमेंट और काग़ज़ी मापदंडों में बदल दिया गया। यह शासन के साथ धोखा है। यह जनता के साथ गद्दारी है। अब सवाल नहीं, आरोप हैं, अब ग्राम कोडरा सवाल नहीं पूछ रहा, अब वह आरोप लगा रहा है, ठेकेदार पर भ्रष्टाचार का आरोप चाटुकार नेताओं पर संरक्षण देने का आरोप प्रशासन पर कर्तव्यहीनता का आरोप और ये आरोप हवा में नहीं, ज़मीन पर खड़े सबूतों के साथ हैं, सीधी माँग है निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दोषी ठेकेदार पर ब्लैकलिस्टिंग और एफआईआर संरक्षण देने वालों पर प्रशासनिक कार्रवाई यदि यह नहीं हुआ, तो यह मामला जिला स्तर से राज्य स्तर तक जाएगा मीडिया से कोर्ट तक पहुँचेगा और प्रशासन को कटघरे में खड़ा करेगा, अब बर्दाश्त नहीं ग्राम कोडरा की जनता अब चुप नहीं रहेगी, स्वास्थ्य के नाम पर हो रहे इस अपराध को उजागर किया जाएगा, अब यह तय करना प्रशासन के हाथ में है या तो वह कर्तव्य निभाए, या फिर इतिहास में दर्ज हो जाए, जनता की जान से समझौता करने वाले अपराधियों की सूची में।




