लखनादौन में अवैध प्लाटिंग नहीं रुकी, तो यह सिर्फ जमीन घोटाला नहीं, प्रशासनिक मिलीभगत का सबसे बड़ा खुलासा बन सकता है..

नगर परिषद सीमा से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अवैध प्लाटिंग ...

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नगर परिषद सीमा से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अवैध प्लाटिंग का जाल बिना अनुमति बिक रही जमीन, जनता ठगी का शिकार..

सिवनी- लखनादौन में इन दिनों जमीन का कारोबार नहीं, बल्कि अवैध प्लाटिंग का संगठित सिंडिकेट चल रहा है। नगर परिषद लखनादौन की सीमाओं से सटे चारों दिशाओं में और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से कृषि भूमि को प्लॉट में काटकर बेचा जा रहा है, वो भी बिना किसी वैधानिक अनुमति के हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल सीधा है क्या प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहा या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

कानून की धज्जियां उड़ती हुईं..

मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959,
मध्यप्रदेश नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम 1973
और मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961
की खुली अवहेलना है, बिना डायवर्सन कृषि भूमि बेची जा रही बिना लेआउट स्वीकृति कॉलोनी काटी जा रही बिना सड़क, नाली, पानी के प्लॉट थमाए जा रहे।

जमीन बेचने का नया फार्मूला आज लो, कल रेगुलर होगा..

कॉलोनाइजर जनता को सपने बेच रहे हैं अभी ले लो, बाद में नियमित हो जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे प्लॉट खरीदने वाले लोग भविष्य में रजिस्ट्री, मकान निर्माण और बिजली-पानी के लिए दर-दर भटकेंगे।

राजस्व को चूना, जनता को धोखा..

इस अवैध खेल से शासन को लाखों-करोड़ों का राजस्व नुकसान आम जनता की गाढ़ी कमाई दांव पर शहर का विकास प्लान पूरी तरह चौपट।

प्रशासन पर सीधे सवाल..

नगर परिषद और राजस्व विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए? क्या अवैध प्लाटिंग करने वालों को संरक्षण मिल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे खेल में मौन सहमति दे रहे हैं?

जमीन माफिया vs कानून कौन जीतेगा?

लखनादौन में हालात ऐसे हैं कि कानून कागजों में है और जमीन पर माफियाओं का राज। अगर अभी भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में यही अवैध कॉलोनियां बड़े घोटाले और जनविरोध का कारण बनेंगी। बिना अनुमति, बिना डायवर्सन वाले प्लॉट खरीदना सीधे जोखिम है बाद में न रजिस्ट्री मिलेगी, न सुविधाएं पैसा फंसेगा, जिम्मेदार कोई नहीं होगा।

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