जर्जर आंगनबाड़ी में पढ़ रहे 23 मासूम, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

सिवनी:-जिले के बांकी गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भवन ...

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सिवनी:-
जिले के बांकी गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भवन वर्षों पुराना और अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, इसके बावजूद उसी भवन में आज भी नन्हे-मुन्ने बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है सिवनी से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में 23 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आंगनबाड़ी भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि छत से प्लास्टर गिरता रहता है, दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और कई जगहों से ईंटें निकलकर गिर रही हैं ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा:-
प्रत्यक्षदर्शियों और पालकों का कहना है कि आंगनबाड़ी भवन में जहां-तहां से सीलन और दरारें साफ नजर आती हैं बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब छत से पानी टपकता है और दीवारों का प्लास्टर झड़ने लगता है बच्चे जिस कमरे में बैठकर पढ़ाई करते हैं, उसी कमरे में दीवारों से टुकड़े गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े हादसे की खबर नहीं है, लेकिन हर दिन बच्चों की जान जोखिम में डालकर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है।

अवगत कराने के बाद भी स्थिति जस की तस:-
आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता ने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी और सेक्टर पर्यवेक्षक को पत्र के माध्यम से जानकारी दी है इसके साथ ही मौखिक रूप से भी भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कार्यकर्ता का कहना है कि उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बार मरम्मत या नए भवन की मांग रखी, लेकिन विभागीय स्तर पर केवल आश्वासन ही मिले हैं।

पालकों में बना रहता है डर और चिंता:-
आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता का कहना है कि वे हर दिन डर के साए में अपने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजते हैं कई पालक तो बच्चों को भेजने से भी हिचकिचाने लगे हैं. पालकों का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण, शिक्षा और सुरक्षा की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है यदि कोई हादसा हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल हर किसी के मन में है।

विभागीय लापरवाही पर उठ रहे सवाल:-
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है वर्षों से आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत नहीं की गई और न ही किसी वैकल्पिक सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की गई ग्रामीणों का कहना है कि शासन स्तर पर आंगनबाड़ी भवनों के लिए बजट भी जारी होता है, फिर भी इस भवन की अनदेखी समझ से परे है। यदि समय रहते ध्यान दिया जाता तो आज बच्चों की जान खतरे में न होती।

ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग:-
बांकी गांव के ग्रामीणों और पालकों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से जर्जर भवन में आंगनबाड़ी संचालन बंद किया जाए और बच्चों को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इसके साथ ही जल्द से जल्द नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण या पुरानी इमारत की मरम्मत कराई जाए।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं:-
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के जीवन की नींव होती है और इस दौरान उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है जर्जर भवन में बच्चों को बैठाकर शिक्षा देना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी गलत है।

अब देखना यह होगा कि इस महिला एवं बाल विकास विभाग गंभीर मामले को कब तक गंभीरता से लेता है और कब तक नौनिहालों को सुरक्षित माहौल मिल पाता है।

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