‘वसूली किंग’ सानू नागवंशी को हटाने में प्रशासन के छूटे पसीने, DSO की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सिवनी:- सिवनी जिले में धान खरीदी की आड़ में चल रहा ‘लूट तंत्र’ अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। सानू नागवंशी नामक जिस कथित एजेंट के कारनामों को BS News Network ने प्रमुखता से उजागर किया था, उसे लेकर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी जिला खाद्य अधिकारी (DSO) मनोज पुराबिया इस ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
कौन दे रहा है ब्लैकलिस्टेड एजेंट को संरक्षण?:- सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सानू नागवंशी आधिकारिक तौर पर धान खरीदी प्रक्रिया के लिए अधिकृत नहीं है, तो वह समितियों पर किस हैसियत से दखल दे रहा है? सूत्रों का दावा है कि सुपरवाइजर शिवजी पटेल का कथित संरक्षण सानू नागवंशी को प्राप्त है, जिसके चलते वह बेखौफ होकर खरीदी केंद्रों पर अपनी पैठ बनाए हुए है।
कंपनी से ब्लैकलिस्टेड, फिर भी सुपरवाइजर का संरक्षण!:- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सानू नागवंशी को संबंधित कंपनी द्वारा पहले ही ‘ब्लैकलिस्टेड’ (Blacklisted) किया जा चुका है। कंपनी द्वारा नकारे जाने के बावजूद वह अभी भी उपार्जन केंद्रों और समितियों में बेखौफ घूम रहा है। चर्चा है कि सुपरवाइजर शिवजी पटेल के अभयदान और संरक्षण के कारण ही एक ब्लैकलिस्टेड व्यक्ति सरकारी व्यवस्था में दखलअंदाजी कर रहा है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि कंपनी द्वारा बाहर किए गए व्यक्ति को सुपरवाइजर ने अपना ‘खास मोहरा’ बना रखा है?
कॉल हिस्ट्री खोल सकती है बड़े ‘लूट तंत्र’ के राज:- खबरों के प्रकाशन के बाद सानू नागवंशी के पैंतरे बदलने की भी खबरें आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार: पकड़े जाने के डर से सानू अब अपने निजी नंबर के बजाय अपने साथियों के मोबाइल फोन का उपयोग कर समितियों से संपर्क साध रहा है। पिछले दो-तीन दिनों से सानू नागवंशी छिंदवाड़ा में ही डेरा जमाए हुए है और लगातार फोन कॉल के जरिए खरीदी समितियों पर से संपर्क बना रहा है। जागरूक नागरिकों और सूत्रों की मांग है कि यदि सानू नागवंशी के मोबाइल नंबरों की कॉल हिस्ट्री और लोकेशन की निष्पक्ष जांच की जाए, तो जिले में चल रहे एक बड़े ‘लूट तंत्र’ का पर्दाफाश हो सकता है।
DSO मनोज पुराबिया की चुप्पी पर सवाल:- हैरानी की बात यह है कि मीडिया में लगातार खबरें आने और शिकायतों के बावजूद जिला खाद्य अधिकारी (DSO) मनोज पुराबिया इस मामले में सुस्ती बरत रहे हैं। प्रशासन के इस ढीले रवैये से किसानों और ईमानदार समिति प्रबंधकों में भारी आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर क्या मजबूरी है कि प्रशासन एक कथित एजेंट पर कार्रवाई करने में पसीना छोड़ रहा है?
पिछली कड़ियों का सार:- फिट-अनफिट का खेल और सानू का दखल:- पाठकों को याद दिला दें कि यह वही सानू नागवंशी है जिसे लेकर पूर्व की खबरों में खुलासा हुआ था कि:बिना आईडी कार्ड और पद के वह सरकारी ‘ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप’ में शामिल था (खबर चलने के बाद जिसे आनन-फानन में कुछ ग्रुप और कुछ के एडमिन पावर से हटाया गया)।सुपरवाइजर शिवजी पटेल के ‘निजी एजेंट’ के रूप में वह केंद्रों पर जाकर धान को जानबूझकर फेल कराने और पास करने के नाम पर डील करता था।ग्राउंड सर्वेयर और गोदाम सर्वेयर के बीच विरोधाभास पैदा कर समितियों को आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। सूत्रों की माने तो खबर प्रशासन के बाद अब सोनू नागवंशी ने केंद्रों पर जाना तो बंद कर दिया लेकिन कॉल के माध्यम से संपर्क साधे हुए हैं।
सुशासन का दावा बनाम हकीकत:- एक तरफ मुख्यमंत्री सुशासन की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ सिवनी में ‘प्राइवेट वसूली एजेंट’ सरकारी तंत्र को बंधक बनाए हुए हैं। समितियों में आक्रोश है और किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ जारी है। यदि सानू नागवंशी और सुपरवाइजर सहित DSO के इस ‘गठबंधन’ को नहीं तोड़ा गया, तो धान खरीदी के इस पूरे सीजन में लगभग 50 लाख से ज्यादा की लूट होना स्वाभाविक है।
बड़ा सवाल यही है:- “अगर सानू नागवंशी अधिकृत नहीं है, तो वह किसके इशारे पर समितियों का दौरा कर रहा है?प्रशासन की यह चुप्पी कहीं किसी बड़े घोटाले की पटकथा तो नहीं?”
अब देखना यह होगा कि कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी इस ‘नेक्सस’ को तोड़ने के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर इस साल भी धान खरीदी की आड़ में बिचौलिए मालामाल होते रहेंगे।





