लखनादौन में धान उपार्जन का महास्कैम..

जांच दल ही चोर, वेयरहाउस ही लूट का अड्डा, सिवनी ...

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जांच दल ही चोर, वेयरहाउस ही लूट का अड्डा, सिवनी प्रशासन मौन क्यों?

सिवनी- मध्यप्रदेश शासन की पारदर्शी धान उपार्जन नीति को लखनादौन में जिस बेरहमी से रौंदा जा रहा है, उसने पूरे सिवनी जिले की प्रशासनिक साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ किसान अपनी खून-पसीने की फसल लेकर केंद्र पहुँचता है, लेकिन उसका सामना सरकार से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खुले गिरोह से होता है? यह गिरोह कोई बाहर का नहीं, बल्कि वही है जिसे शासन ने जांच, निगरानी, भुगतान और भंडारण की जिम्मेदारी दी है। तीन बंदरों की सत्ता लखनादौन का खंड स्तरीय जांच दल जिस खंड स्तरीय जांच दल को धान खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी थी, वही अब रुपया राज का सबसे बड़ा संरक्षक बन बैठा है। सूत्रों के अनुसार यह दल गड़बड़ी देखता है, लेकिन देखता नहीं शिकायत सुनता है, लेकिन सुनता नहीं सच्चाई जानता है, लेकिन बोलता नहीं इसलिए स्थानीय लोग इन्हें तीन बंदर कहने लगे हैं, न देखना, न सुनना, न बोलना और इन तीनों की चुप्पी के पीछे चल रही है लाखों की उगाही, धान खरीदी केंद्र वसूली केंद्र, लखनादौन के धान खरीदी केंद्र अब सरकारी व्यवस्था नहीं, अवैध कमाई के अड्डे बन चुके हैं, हर ट्रॉली, हर बोरा, हर किसान पर कितना दोगे? का सवाल पहले पूछा जाता है, धान बाद में तौला जाता है, अगर पैसा नहीं, तो धान रिजेक्ट, क्वालिटी खराब, नमी ज्यादा, फॉर्म गलत, टोकन कैंसिल लेकिन अगर जेब गर्म तो सड़ा धान भी पास, गीला धान भी पास, कागज अधूरा हो फिर भी पास, MPWLC लखनादौन शाखा सरकारी डाकूघर MPWLC (मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन) की लखनादौन शाखा पर प्रबंधक पवन यादव का नाम हर गड़बड़ी के केंद्र में उभर कर आ रहा है, सूत्र बताते हैं कि पवन यादव के बिना लखनादौन में एक बोरा धान भी आगे-पीछे नहीं होता, कौन सा धान जाएगा, कौन सा रुकेगा, कौन सा रिजेक्ट होगा, यह सब गुणवत्ता नहीं, सौदेबाज़ी तय करती है।

नागरिक आपूर्ति निगम पवन शेंडे का साइलेंट रोल?

पवन शेंडे, केंद्र प्रभारी नागरिक आपूर्ति निगम, लखनादौन, कागजों में वे सरकार के प्रतिनिधि हैं, हकीकत में वे MPWLC गिरोह के कवच बने हुए हैं, धान खरीदी के दौरान नियम टूटते हैं, SOP की धज्जियाँ उड़ती हैं, किसानों से अवैध वसूली होती है लेकिन, न निरीक्षण, न रिपोर्ट, न कार्रवाई।

राजेश शिवहरे ट्रांसफर के बाद भी कुर्सी से चिपका हुआ, सबसे बड़ा बम है?

राजेश शिवहरे, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, MPWLC, जिसका स्थानांतरण छिंदवाड़ा शाखा में हो चुका है, लेकिन वह अब भी लखनादौन में बैठा है, वही फाइलें देख रहा है, वही स्टॉक संभाल रहा है, सूत्रों का दावा है, राजेश शिवहरे इस समय जांच के घेरे में हैं, और उन्हें लखनादौन में रहने दिया जाना खुद में एक साजिश है क्यों? क्योंकि वही व्यक्ति पुराने स्टॉक जानता है गड़बड़ फाइलें जानता है फर्जी एंट्री जानता है और वही सबूत मिटा सकता है। यह सीधा शासन विरोधी अपराध है मध्यप्रदेश शासन के अनुसार ट्रांसफर के बाद कर्मचारी को तुरंत रिलीव किया जाना चाहिए, जांचाधीन कर्मचारी को संवेदनशील पद से हटाया जाना चाहिए लेकिन लखनादौन में? ट्रांसफर रद्द, जांच मज़ाक, शासन आदेश कूड़ेदान में सिवनी जिला प्रशासन की भूमिका चुप्पी या साझेदारी? अब सवाल उठता है जब MPWLC में खुला भ्रष्टाचार नागरिक आपूर्ति निगम की मिलीभगत जांच दल की संदिग्ध भूमिका ट्रांसफर आदेशों की धज्जियाँ सब सामने हैं, तो सिवनी जिला कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी और जिला सहकारी अधिकारी क्या कर रहे हैं? क्या उन्हें दिख नहीं रहा? या क्या वे देखना नहीं चाहते? यह केवल धान नहीं, यह किसानों की हत्या है, किसान जब फसल बेचता है, तो वह अपना साल भर का भविष्य सरकार के हवाले करता है, लेकिन लखनादौन में उसका भविष्य दलाल, बाबू, वेयरहाउस माफिया के हाथों गिरवी है शासन प्रशासन से पूछता है किसान लगा प्रश्न चिन्ह।

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