लखनादौन धान उपार्जन महाघोटाला, जहाँ किसान लुटा, शासन ठगा और जांच दल खुद डकैत बना बैठा?

सिवनी- मध्यप्रदेश शासन की जिस धान उपार्जन नीति को देश-भर ...

Published on-

सिवनी- मध्यप्रदेश शासन की जिस धान उपार्जन नीति को देश-भर में पारदर्शिता, तकनीकी नियंत्रण और किसान-हित की मिसाल बताया जाता है, उसी नीति की लाश लखनादौन में दिनदहाड़े नोची जा रही है। यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित, संरक्षित और सत्ता-पोषित महाघोटाला है, जिसमें वे ही लोग लिप्त हैं जिन्हें शासन ने पहरेदार बनाया था, लखनादौन आज धान खरीदी का केंद्र नहीं, बल्कि सरकारी लूट केंद्र बन चुका है। यहाँ किसान सरकारी काउंटर पर नहीं, बल्कि भ्रष्ट गिरोह की अदालत में खड़ा होता है, जहाँ फैसला उसकी फसल पर नहीं, उसकी जेब पर होता है।

धान नहीं, दलाली की बोली लगती है?

लखनादौन के धान उपार्जन केंद्रों पर जो हो रहा है, वह सरकारी खरीद नहीं, बल्कि संगठित उगाही का कारोबार है। हर किसान से पहले यही पूछा जाता है कितना दोगे? यदि किसान पैसे नहीं देता, तो धान में नमी निकाल दी जाती है, क्वालिटी बिगाड़ दी जाती है, टोकन रद्द कर दिया जाता है, बोरी रिजेक्ट कर दी जाती है और यदि किसान ने रिश्वत दे दी तो सड़ा हुआ धान भी पास, गीला धान भी पास, फर्जी कागज भी मान्य, अधूरे रिकॉर्ड भी स्वीकार यहाँ धान नहीं, सौदा तौला जाता है।

खंड स्तरीय जांच दल, सबसे बड़ा गुनहगार?

जिस खंड स्तरीय जांच दल को यह देखना था कि कितना धान आया, कितना स्टॉक हुआ, कितना वेयरहाउस गया, कितना रिजेक्ट हुआ, वही आज इस घोटाले का सबसे बड़ा साझेदार बन चुका है। यह दल न गड़बड़ी देखता है, न शिकायत सुनता है, न नियम बोलता है, क्योंकि हर ट्रॉली पर, हर बोरे पर, हर किसान पर इसकी हिस्सेदारी तय है। इसीलिए किसान इन्हें तीन बंदर कहते हैं, देखते सब हैं, पर देखते नहीं, सुनते सब हैं, पर सुनते नहीं, जानते सब हैं, पर बोलते नहीं, यह चुप्पी नहीं अपराध में भागीदारी है।

MPWLC गोदाम नहीं, गबन का गढ़?

मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) की लखनादौन शाखा आज सरकारी संस्था नहीं, बल्कि घोटाले का मुख्यालय बन चुकी है, प्रबंधक पवन यादव के बिना कोई बोरा हिलता नहीं, कोई ट्रक निकलता नहीं, कोई स्टॉक चढ़ता नहीं, सब कुछ सौदे से तय होता है, गुणवत्ता नहीं, कमीशन बोलता है।

नागरिक आपूर्ति निगम मौन का सौदा?

केंद्र प्रभारी पवन शेंडे शासन का प्रतिनिधि है, लेकिन व्यवहार में वह वेयरहाउस गिरोह का कवच बन चुका है, जहाँ उसे रोकना था, वहाँ वह चुप है, जहाँ रिपोर्ट करनी थी, वहाँ वह गायब है, जहाँ कार्रवाई करनी थी, वहाँ वह अंधा है, यह चुप्पी नहीं, यह संरक्षित अपराध है।

राजेश शिवहरे सबूत मिटाने का मोहरा?

MPWLC का कर्मचारी राजेश शिवहरे, जिसका स्थानांतरण हो चुका है, आज भी लखनादौन में क्यों बैठा है? क्योंकि वही फर्जी एंट्री जानता है पुराने स्टॉक जानता है, घोटाले की परतें जानता है और वही सबूत मिटा सकता है, यह शासन आदेशों का खुला अपमान है।

सिवनी प्रशासन अपराध पर मौन क्यों?

जिला कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी, जिला सहकारी अधिकारी, SDM लखनादौन, JSO लखनादौन सब जानते हैं, सब देखते हैं फिर भी सब चुप हैं क्यों? क्योंकि यह केवल घोटाला नहीं, यह ऊपर तक फैला गठजोड़ है, किसान नहीं, भविष्य लूटा जा रहा है, धान किसान की फसल नहीं, उसका भविष्य है, उसकी बेटी की पढ़ाई है, उसकी दवा है, उसका कर्ज है और लखनादौन में वही भविष्य वेयरहाउस माफिया की तिजोरी में बंद है, अब शासन को जवाब देना होगा क्या यह सब बिना राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण के संभव है? क्या इतने बड़े घोटाले से जिला प्रशासन अनजान हो सकता है? या फिर यह संरक्षित लूट है? अब चुप्पी भी अपराध है, और इस अपराध की कीमत किसान चुका रहा है।

Tags:

आपके लिए खास

Leave a Comment