लखनादौन में शासन को खुली चुनौती, खंड स्तरीय जांच दल से लेकर MPWLC तक-हर ओर रुपया पहले, नियम बाद में की तानाशाही
सिवनी- मध्यप्रदेश सरकार की पारदर्शी धान उपार्जन नीति को लखनादौन में खुलेआम रौंदा जा रहा है, हैरानी की बात यह है कि जिस खंड स्तरीय जांच दल को गड़बड़ियों पर नकेल कसनी थी, वही अब गोरखधंधे का सरगना बन बैठा है, सूत्रों के अनुसार, MPWLC लखनादौन शाखा के प्रबंधक पवन यादव, उनके संरक्षण में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी और खंड स्तरीय जांच दल की मिलीभगत से धान खरीदी केंद्र उगाही के अड्डे में तब्दील हो चुके हैं। शासन के नियम ताक पर, धौंस और डर का कारोबार धान खरीदी केंद्रों पर अब किसान नहीं, दलाल तय करते हैं सौदा, गुणवत्ता नहीं, रिश्वत तय करती है स्वीकृति, सरकारी मापदंड नहीं, अधिकारियों की जेब चलती है सूत्रों का दावा है कि जांच दल के तीन अधिकारी तीन बंदरों की तरह, एक गड़बड़ी नहीं देखता, दूसरा शिकायत नहीं सुनता, तीसरा सच नहीं बोलता और इसी मौन का फायदा उठाकर हर केंद्र पर खुला अवैध वसूली तंत्र चलाया जा रहा है।
नागरिक आपूर्ति निगम भी सवालों के घेरे में..
पवन शेंडे केंद्र प्रभारी, नागरिक आपूर्ति निगम, लखनादौन पर भी गंभीर आरोप हैं कि वे MPWLC अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। धान तौल, ग्रेडिंग, स्टोरेज और भुगतान की प्रक्रिया, शासन की SOP से हटकर, मनमानी और सौदेबाज़ी के आधार पर चलाई जा रही है।
छिंदवाड़ा ट्रांसफर, फिर भी लखनादौन में जमे राजेश शिवहरे
सबसे बड़ा सवाल राजेश शिवहरे (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, MPWLC) को लेकर खड़ा हो गया है।
उनका स्थानांतरण छिंदवाड़ा वेयरहाउसिंग शाखा में हो चुका है, फिर भी वे लखनादौन शाखा छोड़ने को तैयार नहीं, सूत्र बताते हैं कि राजेश शिवहरे इस समय जांच के घेरे में हैं, और आशंका है कि वे रिकॉर्ड, स्टॉक और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर जांच को गुमराह कर सकते हैं। यह सीधे-सीधे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम और वेयरहाउसिंग निगम के स्थानांतरण आदेशों का खुला उल्लंघन है।
सिवनी जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
जब लखनादौन में किसान लुट रहा है, शासन को चूना लगाया जा रहा है, जांच दल खुद संदिग्ध बन चुका है तो फिर सिवनी जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौन क्यों हैं? क्या यह मौन, अज्ञानता है या संरक्षण की मुहर? अब जवाबदेही तय होनी चाहिए किसानों और जनहित में यह अनिवार्य है कि खंड स्तरीय जांच दल की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो, MPWLC प्रबंधक पवन यादव पर कार्रवाई हो, राजेश शिवहरे को तत्काल लखनादौन से हटाकर छिंदवाड़ा भेजा जाए, नागरिक आपूर्ति निगम के केंद्र प्रभारी पवन शेंडे से स्पष्टीकरण लिया जाए, यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह माना जाएगा कि सिवनी जिला प्रशासन भी इस धान घोटाले का मौन भागीदार है क्या?




