सिवनी- मध्यप्रदेश सरकार जिस धान उपार्जन को किसानों की रीढ़ कहती है, वही लखनादौन में भ्रष्टाचार का कसाईखाना बना दिया गया है। यहाँ न नियम चलते हैं, न कानून यहाँ चलता है सिर्फ रुपये का आतंक धान खरीदी केंद्र अब सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि वेयरहाउस माफिया की चौकी, बिचौलियों के केंद्र, अधिकारियों की एटीएम मशीन बन चुके हैं।
तीन बंदरों की सरकार
लखनादौन का खंड स्तरीय जांच दल जिसे शासन ने आंख, कान और दिमाग बनाया था, वह अब अंधा, बहरा, गूंगा बनकर लूट का पहरेदार बन बैठा है, सूत्र बताते हैं कि हर बड़े खेल से पहले यही जांच दल हरा सिग्नल देता है, अगर वे चाहें तो पूरा केंद्र बंद, अगर पैसे मिले तो सब चालू, हर बोरा रिश्वत का कैदी, धान खरीदी में 100 रुपये नहीं तो बोरा नहीं, 500 नहीं तो तौल नहीं, 1000 नहीं तो स्टॉक नहीं, किसान गिड़गिड़ाता है, बिचौलिया हँसता है, अधिकारी जेब भरता है।
MPWLC प्रबंधक पवन यादव, लूट का जनरल?
लखनादौन MPWLC शाखा का नाम नहीं, अब लोग उसे पवन यादव का दरबार कहने लगे हैं, कौन सा धान गोदाम में जाएगा, किसे रिजेक्ट किया जाएगा, किसे रोककर रखा जाएगा, यह सब क्वालिटी नहीं, कमिशन तय करता है।
नागरिक आपूर्ति निगम पवन शेंडे का अपराधी मौन?
केंद्र प्रभारी पवन शेंडे सरकार के अफसर हैं, लेकिन उनकी चुप्पी भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत बन चुकी है, यदि वे ईमानदार होते तो आज लखनादौन में यह लूट मुमकिन ही नहीं होती।
राजेश शिवहरे ट्रांसफर के बाद भी सिस्टम पर कब्जा?
राजेश शिवहरे जिसे छिंदवाड़ा भेजा जा चुका है, वह आज भी लखनादौन के स्टॉक पर नाग की तरह बैठा है, सूत्रों का दावा है उसे जानबूझकर रोका गया है ताकि पुराने घोटालों के सबूत मिटाए जा सकें, यह सिर्फ घोटाला नहीं, यह आर्थिक राष्ट्रद्रोह है, यह पैसा, किसानों का है, सरकार का है, जनता का है, लेकिन यह जा रहा है, दलालों, बाबुओं, गोदाम माफिया की जेब में।
सिवनी जिला प्रशासन, कब जागोगे?
जिला कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी, जिला सहकारी अधिकारी अब सवाल सीधा है, क्या आप लूट के साझेदार हैं या अंधे दर्शक?




